मणिकर्णिका फिल्म में झांसी की रानी ने पहनी खादी अब सिल्वर स्क्रीन पर चमकेगा यह पारंपरिक वस्त्र

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गोवा खबर:यह अब आधिकारिक है ! कंगना रनौत, आगामी भारतीय महाकाव्य जीवनी पर आधारित र्फिल्म ‘मणिकर्णिका: द क्वीन ऑफ झांसी’ में अपनी प्रमुख भूमिका में  पारंपरिक वस्त्र  खादी पोशाक में नज़र आयेंगी । मणिकर्णिका में, मुख्य पात्र, कंगना रनौत और अन्य कलाकार खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) द्वारा प्रायोजित खूबसूरत खादी की वेशभूषा में देखें जा सकेंगे |

आयोग के अध्यक्ष  विनय कुमार सक्सेना ने भारत की स्वतंत्रता की अखंड भावना का हिस्सा होने पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि “हम सभी जानते हैं कि 1926 में, गांधीजी ने खादी को स्वराज के प्रतीक के रूप में स्वीकार किया था और  स्वतंत्रता के  वस्त्र  के अंतिम सूत की कताई की । शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि चरखे के साथ गांधीजी के प्रयास से कुछ दशक पहले वाराणसी में मणिकर्णिका या मनु के रूप में पैदा हुई एक लड़की ने न केवल वेदों और पुराणों को पढ़ने में तथा घुड़सवारी और तलवारबाजी में महारत हासिल की, बल्कि झांसी की रानी के रूप में पहने जाने  से पूर्व बुनाई, कताई  में भी महारत हासिल की ।”

उन्होंने आगे कहा कि रानी लक्ष्मीबाई स्वतंत्रता के लिए सबसे आकर्षक योद्धाओं में से एक हैं, जिन्होंने आजादी के पहले युद्ध में खादी धारण की  थी। यह एक बार फिर साबित करेगा कि भारत में ब्रिटिश शासन से पूर्व, खादी हमारे देश में फल-फूल रही थी और “बाद में यह चरखा ही था जिसने अंग्रेजों को भारत से खदेड़ कर बाहर किया ।”

अध्यक्ष ने आगे बताया कि इस फिल्म के लिए खादी परिधानों का प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर नीता लुल्ला ने डिजाइन किया है। खादी पहनने का अर्थ है चरखे पर सूत कातने वाले शिल्पकारों के प्रति सम्मान व्यक्त करना। इस मशीन-युग में भी वे (कारीगर) हाथ से घूमने वाले चरखे से  वस्त्र तैयार करने के लिए चौबीसों घंटे काम करते हैं। मेरा मानना है कि सिनेमा की मुख्य धारा से जुड़कर खादी जन साधारण और युवा वर्ग में समान रूप से प्रचलित होगी ।

 

फिल्म में ‘मणिकर्णिका’ के लिए खादी में तैयार की गई पोशाक में मजबूती और साहस दोनों झलकता है |  खादी  वस्त्र  जैसे कच्चे सूती, ब्रोकेड और पैठनी में सावधानीपूर्वक  तैयार किया  गया है।

फिल्म निर्माताओं के साथ जुड़ने का आयोग का मुख्य उद्देश्य है  खादी के  भारतीय इतिहास के साथ घनिष्ठ और मजबूत संबंध के बारे में लोगों को जागरूक करना ।

यह फिल्म 25 जनवरी, 2019 को सिनेमाघरों में दिखाई जाएगी ।